मुख्यमंत्री ने पटना में ग्राम संसद-बिहार चैप्टर के मुखिया संवाद कार्यक्रम का दीप प्रज्वलित कर उद्घाटन किया और राज्य भर से आए पंचायत प्रतिनिधियों को संबोधित किया।
सबसे ताक़तवर व्यक्ति मुखिया
उन्होंने कहा कि लोग अक्सर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी को देश की तीन बड़ी शक्तियाँ मानते हैं, लेकिन उनका मानना है कि इस देश में सबसे ताक़तवर व्यक्ति मुखिया है, जिसके पास वास्तविक अधिकार होता है। विधायक या सांसद का चुनाव शायद आसान हो, लेकिन ज़मीनी स्तर पर मुखिया का चुनाव सबसे कठिन होता है।
पंचायतों के लिए
“पंचायतों में तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराने के लिए पंचायती राज विभाग में इंजीनियरिंग सेल विकसित किया जाएगा. इससे मुखिया को विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में तकनीकी सहायता मिलेगी.”
“जनसमस्याओं के त्वरित समाधान के लिए प्रत्येक माह के पहले और तीसरे मंगलवार को पंचायत स्तर पर सहयोग शिविर आयोजित किया जा रहा है. शिविर में प्राप्त आवेदनों का 30 दिनों के अंदर निष्पादन सुनिश्चित किया जा रहा है. इसके अलावा प्रत्येक माह के अंतिम रविवार को ग्राम सभा की बैठक आयोजित करने की व्यवस्था शुरू की गई है.”
उन्होंने कहा कि पंचायत परिसीमन पूरा होने के बाद ही अगला पंचायत चुनाव कराया जाएगा, और पंचायतें ईंट-भट्ठों, निजी स्कूलों और मोबाइल टावरों जैसे स्रोतों से अपना राजस्व जुटाएँ, ग़रीबों पर नया कर डाले बिना।
2037 तक समृद्ध बिहार
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के विकसित भारत 2047 और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समृद्ध बिहार के संकल्प को आगे बढ़ाने में ग्राम संसद की भूमिका पर चर्चा होनी चाहिए। बिहार के 125 वर्ष पूरे होने का वर्ष 2037 राज्य के लिए अहम पड़ाव होगा, और सुझाव ग्राम संसद से भी आने चाहिए।
यह पाठ समाचार रिपोर्टों पर आधारित है। पूरा भाषण ऊपर दिए वीडियो में देखें।
स्रोत: Asianet Newsable (IANS), ETV Bharat, Patna Press



