राज्य के 125वें वर्ष, 2037 तक विकसित बिहार: विकसित भारत 2047 में बिहार का योगदान। यानी ऐसा शासन जो हर प्रखंड तक पहुँचे, ऐसे अवसर कि युवाओं को रोज़गार के लिए बाहर न जाना पड़े, और ऐसा विकास जिसकी शुरुआत गाँव से हो।
शिक्षा और युवा
सभी 534 प्रखंडों में सरस्वती विद्या निकेतन मॉडल स्कूल, निजी स्कूलों में फ़ीस पारदर्शिता, बकाया फ़ीस के कारण किसी बच्चे को परीक्षा से वंचित न करना, और गया टेक्नोलॉजी सेंटर जैसे कौशल केंद्र ताकि युवाओं को रोज़गार के लिए बिहार न छोड़ना पड़े।
स्वास्थ्य
पीपीपी मॉडल पर हर ज़िले में मेडिकल कॉलेज, ज़िला अस्पतालों से कम रेफ़रल, हर पात्र परिवार का आयुष्मान कार्ड, और बच्चों में ठिगनापन व दुबलापन घटाने के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों की तकनीक आधारित निगरानी।
सड़क, बिजली और आधारभूत संरचना
दस ज़िलों में सैटेलाइट टाउनशिप, गया–राजगीर–मुज़फ़्फ़रपुर जैसे तेज़ सड़क और रेल संपर्क, पटना मेट्रो और हवाई अड्डे का विस्तार, तथा वाल्मीकिनगर, कैमूर और अन्य पर्यटन स्थलों के लिए हेली-टूरिज़्म।
कृषि और ग्रामीण विकास
अपने संसाधनों से सशक्त ग्राम पंचायतें, हर महीने के अंतिम रविवार को पंचायत विकास दिवस, और ग्राम संसद जैसी ग्रामीण संस्थाओं की राज्य की नीतियों में भागीदारी।
उद्योग और रोज़गार
निवेश और रोज़गार: गया में ₹6,000 करोड़ का एकीकृत इस्पात संयंत्र, उद्योगों के लिए एकल खिड़की स्वीकृति, एमएसएमई को सहायता, और जीविका के ज़रिए एक करोड़ लखपति दीदी।
महिला सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय
हर नागरिक की गरिमा और सुरक्षा: हर महीने 10 तारीख़ को ₹1,100 पेंशन, स्कूल-कॉलेजों पर पुलिस दीदी, पिंक पुलिसिंग और तेज़ डायल 112, बुज़ुर्गों के लिए घर बैठे रजिस्ट्री, और हर प्रखंड में जन कल्याण शिविर।
