अगर लालू जी का अत्याचार न होता, तो शायद मैं राजनीति में नहीं आता

लोकतंत्र में कोई किसी की पाठशाला नहीं होता। अगर लालू जी का अत्याचार न होता, तो शायद मैं राजनीति में नहीं आता। यह लोकतंत्र है, यहां हर व्यक्ति अपनी पहचान खुद बनाता है।