मैं गंगा हूं…
कभी थकी, कभी मैली सही, पर श्रद्धा और संकल्प ने मुझे फिर से जीवन दिया। हरिद्वार में आज मैं फिर बह रही हूं, निर्मल, अविरल और दिव्य। ✨
जब इंसान सुधरता है, तो प्रकृति खुद ही संवर जाती है… पंछी लौट आते हैं, जल फिर पवित्र हो जाता है। ?️
नमामि गंगे मिशन के संकल्प और समर्पण से मेरी दिव्यता फिर लौट आई है।



