देश की जनता अब परिवारवाद को बढ़ावा देने वाली पार्टियों के छल-प्रपंचों को समझ चुकी है।

देश की जनता अब परिवारवाद को बढ़ावा देने वाली पार्टियों के छल-प्रपंचों को समझ चुकी है। ये भले ही इस मुग़ालते में रहें कि पीढ़ी दर पीढ़ी इनके नेता के ही सिर ताज सजेगा, लेकिन लोकतंत्र में सत्ता का बागडोर सौंपने का जिम्मा जनता के हाथों में होता है, अब कोई भी इनके झांसे में नहीं आने वाला है।