मैं समय हूं…मैंने देखा है वो दौर, जब एक परिवार के राज में जनता के हक का पैसा खुलेआम खाया जाता था।

मैं समय हूं…

मैंने देखा है वो दौर, जब एक परिवार के राज में जनता के हक का पैसा खुलेआम खाया जाता था।

लेकिन मैं वो दौर भी देख रहा हूं, जब जनता का हक सीधे जनता के बैंक खाते में पहुंच रहा है।